व्यक्तित्व

व्यक्तित्व क्या होता है?

व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके वर्तमान व्यवहार, भावनाओं/संवेदनाओं, उत्प्रेरण और आचार-विचार प्रक्रिया का संमिश्रण होता है जो उसे परिभाषित और अन्य व्यक्तियों से उसे अलग करता है। दूसरे शब्दों में यह उसकी प्रकृति या गुण जो उसके चरित्र या जीवन की विभिन्न घटनाओं या परिस्थितियों के विरुद्ध उसकी प्रतिक्रिया को नियंत्रित करतें हैं, का सम्मिश्रण होता है। इसे व्यक्ति के विशिष्ट व्यवहार, मानसिक संचेतना और संवेदनात्मक प्रवृति जैसे तत्व जो जैविक कारणों से विकसित और पर्यावरण के सम्बंधित कारकों से प्रभावित होतें हैं, के रूप में भी परिभाषित किया जा सकता है।  चूँकि व्यक्ति के चारों तरफ का परिवेश स्थिर नहीं होता है और सतत बदलता रहता है, उसका व्यक्तित्व भी परिवेश द्वारा समय-समय  पर किये जा रहे हस्तक्षेप के अनुसार समय के साथ बदलता और विकसित होता रहता है। परन्तु यहाँ पर संज्ञान में लेने वाली बात यह है कि व्यक्ति के जीवन में अनुभव से विकसित मौलिक विश्वास, व्यवहार विचार ही किसी भी घटना के प्रति उसकी प्रतिक्रियां के कारक होते हैं।

यद्यपि व्यक्तित्व की कोई सर्वमान्य परिभाषा नही है, इसके अधिकाँश सिद्धांत उत्प्रेरण और व्यक्ति का अपने परिवेश के साथ लेनदेन पर अपना ध्यान केद्रित करते हैं। अतः हमारा व्यक्तित्व इन सभी विशेषताओं और चरित्र का योग होता है और यह व्यक्ति को अन्य व्यक्तियों की तुलना में विशिष्ट बनाता है।

यदि हम अपनी विशिष्टताओं पर ईमानदारी से मनन करके उन्हें सूचीबद्ध करें तो हम अपने व्यक्तित्व को कुछ हद तक समझ सक्रतें हैं। हम संवेदनशील, दूसरों का ध्यान रखने वाले, हठी, दृढ़प्रतिज्ञ, उंची आकांक्षा रखने वाले, परिश्रमी और विश्वशनीय हो सकतें हैं। वाह्यमुखता, अंतर्मुखता, विचारों का खुलापन, कार्य के प्रति ईमानदारी, तक समझ सकतें हैं। दूसरों के विचारों की स्वीकृति और असंयत व्यवहार भी ऐसे पांच मुख्य गुण हैं जो व्यक्ति के व्यक्तित्व को परिभाषित करते हैं ।

व्यक्तित्व मनोविज्ञान विभिन्न व्यक्तियों तथा व्यक्ति-समूहों के व्यक्तित्व की समानता और विषमता का अध्ययन करता है। ‘प्रयास’ मात्र अपने पास आने वाले व्यक्तियों के व्यक्तित्व PAREEपरीक्षण, रेखांकन में ही लिप्त नहीं है बल्कि इस दौरान पाई गई कमजोरियों को भी नाम-मात्र के सेवा शुल्क पर दूर भी करता है ।